Saturday, March 7, 2020

बेरोजगारी दूर करने के उपाय - tipsreport

गरीबी के नाम पर आज तक अरबों-खरबों रूपये बाँटे जा चुके हैं, किन्तु गरीबी है कि वह जमी हुई है। गरीबी के नाम पर सरकार की समस्त योजनाएं क्यों फेल हो रही हैं? कारण सीधा-सादा है, सच्चे मन से प्रयास न होना।

देश में काम करने वालों की कोई कमी नहीं है, लाखों करोड़ों युवा विभिन्न डिग्रियाँ लिए सुनहरे भविष्य के सपने संजोये बूढ़े हुये जा रहे हैं। इन्हें शासन से काम चाहिये और काम उन्हें तभी मिल सकता है जब ग्रामीण स्तर तक रोजगार के अवसर मुहैय्या हों।

रोजगार के अवसर मुहैय्या कराने के लिये शासन को ग्रामीण स्तर तक रोजगार प्रशिक्षण केंद्र खोलने की व्यस्था करनी चाहिए जहां - पापड़, अचार, मुरब्बा, डबल रोटी, बिस्कुट इत्यादि से लेकर रिपेयरिंग के सम्पूर्ण कार्यों का प्रशिक्षण नि:शुल्क देने की व्यवस्था करनी चाहिये ताकि गरीब से गरीब युवक सेवा, व्यवसाय इत्यादि के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर अपने सपने साकार कर सके।

इससे जहां एक ओर लाखों-करोड़ों युवाओं की रोजी-रोटी की समस्या हल हो सकेगी, वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मुकाबला करने में भी ये संस्थायें सफल हो सकेंगी। यहां एक बात और स्पष्ट कर देना चाहूंगा, शहरों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र शैक्षणिक मामले में अभी भी काफी पिछड़े हुये हैं।

इन संस्थाओं में शैक्षणिक अंकों के आधार पर न रख कर उनके व्यवहारिक ज्ञान व उत्साह को ही आधार माना जाये। विद्यालयों में पढऩे वाले सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण नहीं होते। इनमें से कई द्वितीय, तृतीय व कुछ तो मुश्किल से उत्तीर्ण ही हो पाते हैं किन्तु इसका यह आशय बिल्कुल नहीं है कि पढ़ाई में किन्हीं कारणों से पिछड़े छात्र निपट मूर्ख ही होते हैं बल्कि कई मायनों में ये मेधावी छात्रों से भी तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं।

बस जरूरत है तो उन्हें रोजगार व प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करने की, जहां तक मेधावी छात्रों का सवाल है तो उनके लिये सफलता के कई द्वार खुले हैं, उपरोक्त योजनाओं के क्रियान्वयन से जहां एक ओर ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन रूकेगा वहीं लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और चोरी, डकैती, हत्या इत्यादि आपराधिक गतिविधियां भी थमेंगी।
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बेरोजगारी को दूर करने के उपाय:


भारत में बेरोज़गारी की समस्या अधिक है जिसके कारण गरीबी की समस्या हल नहीं हो पा रही है। बेरोज़गारी को दूर करने के लिए:

  • सरकार को छोटे उद्योगों को मदद करनी चाहिए, नये कारखाने खोलने चाहिए जहाँ लोगों को नौकरी मिल सके।
  • शिक्षा के अतिरिक्त तकनीकी कोचिंग भी देनी चाहिए ताकि लोग भिन्न प्रकार के काम कर सकें और उन्हें रोज़गार मिले।
  • सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जिससे हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को जरुर नौकरी मिल सके।
  • सरकार को देश की उन्नति के लिए नित्य नयी योजनायें अपनानी चाहिए और सरकार को सरकारी पूंजी को नियंत्रण में रखना चाहिए, भारतीय बाजार को विदेशों में भी फैलाना होगा।


जनसँख्या को नियंत्रित करना:


जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण आवश्यक है, जिस अनुपात में रोजगार से साधन बढ़ते है, उससे कई गुना अनुपात में जनसंख्या में वृद्धि देखी जाती है। इसीलिए जनसंख्या में वृद्धि पर रोक आवश्यक है। जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए हमें सर्वप्रथम लोगों को शिक्षित करना होगा तभी जाकर अधिक बच्चे पैदा करने की सोच को बदला जा सकता है।

सरकार को चुनाव कैंपिंग की तरह ही जनसंख्या नियंत्रण अभियान चलाना चाहिए और जगह-जगह जाकर रैलियां करनी चाहिए, तभी जाकर लोगों में जागरूकता फैलेगी।

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कृषि का विकास:


भारत एक कृषि-प्रधान राष्ट्र है, कृषि विकास होने से बेरोजगारी में कमी आ सकती है। कृषि में नवीन उपकरणों, उन्नत बीजों, सिंचाई योजनाओं, कृषि योग्य नई भूमि, वृक्षा-रोपण, बाग़-बगीचे लगाने व सघन खेती से रोजगार के अवसर बढ़ाये जा सकते है।

कृषि विकास होने से भारत की जीडीपी में भी सुधार हो जाएगा।कृषि विकास से व्यक्ति की आय में वृद्धि होगी, जीवन स्तर ऊँचा उठेगा, इच्छा व क्षमता में विकास होगा। ये सब बेरोजगारी को कम करेगी।

शिक्षा में सुधार:


शिक्षितों की बेरोजगारी आज एक ज्वलंत प्रश्न है! आज विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से निकलकर युवक नौकरी की तरफ भागते है। हमारे देश में शिक्षित बेरोजगारी की समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है, इससे यह बात तो साबित हो जाती है कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में कहीं ना कहीं तो कमी जरूर है।

रोजगार दफ्तरों की स्थापना:


बेरोजगारी का एक कारण जानकारी का अभाव भी है, बड़े पैमाने पर रोजगार दफ्तरों की स्थापना की आवश्यकता है।  देश के अन्दर रोजगार शिक्षित एवं प्रशिक्षित, कुशल एवं अकुशल श्रमिकों तथा अपढ़ किन्तु शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बेकारों को रोजगार सुविधाओं व सुअवसरों से अवगत कराया जा सकता है।

रचनात्मक कार्य:


राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों और मध्य-वर्गीय लोगों के लिए भवनों का निर्माण सभी क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। इससे एक तरफ लोगों को रोजगार निवेश दूसरी तरफ श्रमिकों को अच्छे निवास मिलने से उनके स्वास्थ्य में सुधार हो सकेगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाज सेवाओं तथा कार्यालयों का विस्तार एवं विकास होने से रोजगार के अवसर बढ़ेगा। इसी तरह बाँध, पुल, सड़क, पार्क एवं नदी-घाटी आदि के निर्माण के कार्यों को बढ़ावा देकर अनेक बेरोजगार व्यक्तियों के श्रम का उपयोग किया जा सकता है।

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