Friday, December 13, 2019

भाजपा सरकार की विफलताएं | Failures of BJP Government in Hindi


किसी भी देश को चलने के लिए एक सिस्टम की जरूरत होती है या कहें कि एक संविधान की जरूरत होती है,   इसी संविधान की शपथ लेकर कोई भी नेता या मंत्री सत्ता का भोग लगाता है। भोग लगाते-लगाते वह सत्ता के नशे में इस तरह खो जाता है कि उसे खुद याद नहीं रहता कि उसने जनता से क्या-क्या वादे किए हैं।

शायद इसमें सिर्फ उन नेताओं की गलती नहीं है बल्कि गलती उन लोगों की भी है जो इस तरह के नेता, इस तरह के मंत्रियों या कहें किसी एक पार्टी पर आंख बंद करके अंधा भरोसा कर लेते हैं।

amit shah(left) and narendra modi(right)
Pic Credit: PTI
भक्ति एक जगह पर ठीक लगती है लेकिन बात जहां पर अंधभक्ति किया जाए तो वहां से इंसान खुद का पतन शुरू कर देता है। यह बात मैं किसी एक पार्टी के लिए नहीं बल्कि दुनिया की किसी भी पार्टी के लिए बोल रहा हूं जहां डेमोक्रेसी जिंदा है, अंधा भरोसा एक जिद है कोई समाधान नहीं।

वैसे भारत में वर्तमान समय की सरकार पर भारत के लोगों ने अंधा भरोसा किया है, सरकार ने कुछ कार्य अच्छे भी किए हैं लेकिन बहुत से मामलों में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है तो आइए जानते हैं भाजपा सरकार की विफलताएं (Failures of BJP Government).

1. नोटबंदी

8 नवंबर 2016 को, भारत सरकार ने सभी ₹500 और 1,000 के नोटों के विमुद्रीकरण की घोषणा की थी। सरकार का कहना था कि इससे नकली नोट, काले धन, टेरर फंडिंग पर रोक लग जाएगी। इतना ही नहीं सरकार ने इसका फायदा होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में जोर-शोर से उठाया था।

बाद में जैसा सरकार ने कहा वैसा कुछ नहीं हुआ, ना तो नकली नोटों में कमी आई और ना ही काला धन पकड़ा गया। उल्टा भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, लोगों की नौकरियां चली गई, कई कंपनियां बंद हो गई,  लोग पैसों के लिए मोहताज हो गए। 

अर्थशास्त्री अरुण कुमार और सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अध्ययन बताते हैं कि हम अभी तक इस जंगल से बाहर नहीं हैं।

2. सबसे बड़ी विफलता, नफरत की खेती

दलितों और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर हमलों में तेज वृद्धि हुई है। विकास की बात को छोड़कर हिंदू-मुस्लिम भारत-पाकिस्तान जैसी भटकाने वाली बातों पर अधिक जोर देना भाजपा सरकार की विफलताओं में से एक है। मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं में वृद्धि नफरत की खेती का एक और परिमाण है।
टाइम ने भी नरेंद्र मोदी को 20 मई, 2019 को प्रतिष्ठित US-Based टाइम मैगजीन (एशिया संस्करण) का कवर बनाया था। टाइम मैगजीन के कवर में मोदी को "India's divider in chief" बताया गया था।

दरअसल इसके जरिए लेखक भाजपा की हिंदुत्ववादी राजनीति पर प्रकाश डालना चाहता था क्योंकि किसी भी एक धर्म की राजनीति करना लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं है।

3. महंगाई

महंगाई एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में कोई भी बात नहीं करना चाहता, यह वही महंगाई है जो कांग्रेस की सरकार के समय आज की तुलना में बहुत कम हुआ करती थी। पेट्रोल-डीजल, L.P.G. सिलेंडर से लेकर खाद्य सामग्री तक महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है लेकिन कहीं भी महंगाई की बातें नहीं होती है।

महंगाई का एक कारण नोटबंदी और जीएसटी का लागू होना भी हो सकता है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल की वजह से खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर है। नवंबर 2018 में खुदरा महंगाई दर महज 2.33 पर्सेंट थी।

4. कश्मीर को गलत तरह से संभालना

जैसा कश्मीर को हमें दिखाया जाता है वैसा शायद वहां पर कुछ है ही नहीं, 1996 के बाद पहली बार, अनंतनाग जिले में उपचुनाव नहीं हो सके और तनावपूर्ण स्थिति के कारण इसमें देरी हुई। आठ महीने लंबे कर्फ्यू ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इससे भी बुरी बात यह है कि भाजपा के कार्यकाल के पहले तीन वर्षों में शहीद हुए हमारे सैनिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि (72%) हुई।

5. संस्थानों का कमजोर होना

भारत के इतिहास में शायद यह पहली बार होगा जब भारत की ही सरकार भारत के ही संस्थानों को कमजोर और तोड़ने में लगी हुई है, RBI, CBI से लेकर RTI तक सरकार ने सब को अपने कब्जे में कर रखा है।

प्रधानमंत्री शायद ही कभी संसद में जाते हैं, और जब वे जाते हैं तो सदन के पटल पर उठाए गए सवालों के जवाब देने की तुलना में चुनावी भाषण  देना अधिक प्रयोग करते हैं।

जिस लोकपाल बिल को लेकर पूरे भारत में हंगामा होता रहा उस लोकपाल बिल को सरकार ने चालाकी से भुला दिया कि एक सर्वोच्च न्यायालय को कार्रवाई करने का निर्देश देना पड़ता है। एक मुख्यमंत्री तुरंत पद संभालने के बाद खुद के खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को वापस ले लेता है और कोई कुछ नहीं कर पाता।

6. मीडिया का गलत उपयोग

मीडिया का एक समूह गुलाम बन गया है, ऐसा लगता है कि किसी ने मीडिया को खरीद लिया हो मीडिया में चारों तरफ एक जैसी बातें होती हैं। कोई भी असल मुद्दों पर बात नहीं करता सिर्फ भटकाने वाले तथ्यों को जनता के सामने रखा जाता है। कई चैनलों पर डिबेट एक एजेंडे के तहत होती है।

यदि कोई चैनल ऐसा नहीं करता तो उसे 24 घंटे के लिए ब्लैक आउट कर दिया जाता है या उसके ऑफिस पर छापा मारा जाता है, यदि कोई पत्रकार जनता के सामने सच लाना चाहता हो तो चैनल से हटा दिया जाता है।

7. किसानों के साथ धोखा

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसान आत्महत्याएं तेजी से बढ़ीं हैं। "किसानों की आय को दोगुना करने" ऐसा बोलने वाली सरकार से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि जितना आपने किसानों को समर्थन मूल्य देने का वादा किया था क्या आप उस वादे को निभा रहे हैं?

जब किसान अपने हक के लिए आपसे बात करने आते हैं तो दिल्ली में घुसने से पहले ही आप उन पर लाठी-डंडे और आंसू गैस जैसे तत्वों का उपयोग करते हैं। किसानों ने भाजपा सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सभी तरह के आंदोलन किए। भाजपा सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने किसी के साथ मिलने या यहां तक कि उनकी उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया।

विडंबना यह है कि जब प्रधानमंत्री 2013 में चुनाव प्रचार कर रहे थे, तो उन्होंने इन मुद्दों को संबोधित करने का वादा किया था। लेकिन शायद सत्ता के मोह ने उनको इन बिंदुओं को ठीक करने के बजाए क्षतिग्रस्त किया, इस क्षति को कम करने में वर्षों लग जाएंगे।

प्रधानमंत्री अक्सर विरासत के मुद्दों पर बात करना पसंद करते हैं। सच्चाई यह है कि उनकी विरासत खुद के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

(Failures of BJP Government) भाजपा सरकार की विफलताएं और भी हो सकती हैं अगर आप इनके बारे में कुछ भी जानते है तो कमेंट में जरूर बताएं।

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