Tuesday, December 4, 2018

भविष्य में पानी की कमी मानव जाति के लिए बनेगी बड़ा खतरा, बूंद-बूंद को तरसेंगे लोग

विकास की अंधाधुंध रेस में हम लगातार प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधनों को ठेस पहुंचा रहे हैं। जिसके कारण हमारी धरती को नुकसान पहुंच रहा है इसलिए कुछ समय से हमारी धरती के वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़त देखी गई है। वहीं हमारे वातावरण में जलवायु परिवर्तन भी देखा गया है, अगर लगातार ऐसा ही होता रहा तो कहीं हमारी प्रजाति विलुप्त ही ना हो जाए। वैज्ञानिक इस बात को भली-भांति जानते हैं कि हमारी पृथ्वी में अगर छोटा सा बदलाव होता है तो वह हमारे लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
आज के समय में पानी की कमी भी एक बहुत बड़ी समस्या है, जिस पर कोई राजनेता बहस करना ही नहीं चाहता। इसलिए इंसानों को अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके पानी को बर्बाद ना करने का संदेश लोगों तक पहुंचाना होगा, आज भी हमारी दुनिया में कई ऐसी जगह हैं जहां के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस जाते हैं। अगर आपको पानी आसानी से मिल जाता है तो समझ लीजिए कि आप भाग्यशाली हैं क्योंकि अगर ऐसा ही चलता रहा तो हो सकता है कि भविष्य में आपके बच्चे पानी की बूंद के लिए तरस जाएं।
भारत में भी कई ऐसे गांव हैं जहां के लोग केवल पानी के लिए कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं, लोग सुबह उठते ही पानी भरने के लिए जाते हैं और शाम होने से पहले भी पानी भरने जाते हैं लोगों का पूरा दिन पानी की समस्या से निपटने में ही निकल जाता है। सही मायने में तो पानी की कीमत उन लोगों को पता चल रही है जो आज पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। समय तो अब ऐसा आ गया है कि जहां पर पानी की कमी है वहां पर देश के बड़े-बड़े नेता जाना भी पसंद नहीं करते हैं।
मुझे लगता है कि पानी की समस्या एक बेहद ही गंभीर विषय है जिस पर केवल चर्चा ही नहीं बल्कि साथ मिलकर काम करना होगा। एक रिर्पोट के मुताबिक 2050 तक भारत में भारी जल संकट आने वाला है। लगातार बढ़ रही आबादी पानी की समस्या को बढ़ाती जा रही है। पिछले कुछ समय में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता बड़ी तेजी से घटी है। शायद यह प्रकृति द्वारा दी गई एक गंभीर चेतावनी है।
अगर इंसानों ने अपने सुख के लिए अपनी आदतों में सुधार नहीं किया तो भविष्य में पानी की कमी रौद्र रूप ले सकती है। बड़े बड़े कारखानों में पानी की बर्बादी को रोकना होगा। अभी तो लोगों को पीने के लिए का शुद्ध पानी नही मिल रहा है उपर से भविष्य की परेशानी, यह चिंता का ही सबब बनते दिखाई दे रहा है। जल संरक्षण के लिए इंसानों को अपनी नीति में बड़ा बदलाव लाना होगा।
आज भी हमारी नीति में बड़े-बड़े बांध बनाना है। बड़े-बड़े बांध बनाने से भारत को फायदा कम और नुकसान ज्यादा भुगतना पड़ता है और इस बात को यूएन भी साबित कर चुका है। कभी शांत माहौल में जल के बिना जीवन की कल्पना का घर देखना शायद तब आपको जल का असली मतलब समझ में आ जाएगा। इसके बावजूद भी अगर आप जल संरक्षण के लिए आगे नहीं आए तो आप जानते ही होंगे कि प्रकृति की हल्की सी करवट इंसानों को कितना नुकसान पहुंचाती है। हमारे लिए असंभव कुछ भी नहीं है, बशर्ते सरकार और समाज दोनों मिलकर इसके लिए प्रयास करें।

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