Tuesday, November 27, 2018

बढ़ते हुए वायु प्रदूषण पर सरकार सुस्त, जनता को ही ढूंढने होंगे उपाय, पढ़िए पूरी खबर

प्रदूषण आज के समय में पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है, समय के साथ-साथ प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। लोगों की लापरवाही और सरकार के सुस्त रवैया के कारण वायु 'प्रदूषण' सामान्य स्तर से खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। वैसे तो हमारे देश में जगह-जगह पर प्रदूषण को रोकने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है लेकिन इसका असर असल जिंदगी में दिखाई नहीं देता।
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वायु प्रदूषण रोकने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है लोगों की जागरूकता, जैस-जैसे लोगों में वायु प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे लोगों को वायु प्रदूषण से होने वाले बुरे परिणामों के बारे में पता चलता जाएगा। आज भी हमारे देश में कई ऐसे किसान मौजूद हैं जो जानकारी ना होने के कारण अपने खेत में अक्टूबर और नवंबर के महीने में पराली जला देते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अकेले पंजाब और हरियाणा में ही प्रतिवर्ष तकरीबन 35 मिलियन टन कृषि अवशेष जलाएं जाते हैं।
parali jalana
देखा जाए तो पराली जलाने से जो धुआं उत्पन्न होता है उससे हमारा वातावरण दूषित होता है। वैज्ञानिकों की मानें तो एक टन पराली जलाने से 2 किलो सल्फर डाइऑक्साइड, 3 किलो कणिका तत्व, 60 किलो कार्बन मोनोऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाइआक्साइड, 199 किलो राख निकलती है। जिसके कारण काफी बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलता है। पराली जलाने के कारण जो धुआं उत्पन्न होता है, वह हवा के बहाव के कारण धीरे-धीरे देश के अलग-अलग राज्यों में पहुंच जाता है और वातावरण को प्रदूषित करता है।
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इसका बेहतरीन उदाहरण आपको दिल्ली में देखने को मिल जाएगा जहां अक्टूबर और नवंबर के महीने में बुरी तरह से धुंध छा जाती है। पराली जलाने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिसम्बर 2015 मे ही रोक लगा दी थी और सरकार को आदेश दिया गया था कि किसानों को जागरूक किया जाये। इसके साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एक और आदेश दिया था कि जो किसान पराली चलाते हुए पकड़े जाएं उन्हें कड़ा आर्थिक दंड दिया जाए। लेकिन सरकार की सुस्ती के कारण ये आदेश मिट्टी में मिल गए।
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जिसका नतीजा आज भी पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है, लेकिन अब भी समय है क्योंकि प्रकृति से खिलवाड़ करना पूरी मानव जाति के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए हमें अपने स्तर से लोगों में जागरूकता लानी होगी, किसानों को समझाना होगा और प्लास्टिक इस्तेमाल पर भी रोक लगानी होगी, तभी प्रदूषण जैसे वातावरण के कैंसर को खत्म किया जा सकता है। वरना वह दिन दूर नहीं जब पूरी मानव जाति को सांस लेने के लिए भी पैसे चुकाने पड़ेंगे। तब आपको कैसा लगेगा जब सांस लेने के लिए आपको हवा खरीदनी पड़ेगी।

दोस्तों वायु प्रदूषण के लिए आप किसको जिम्मेदार मानते हैं और वायु प्रदूषण पर सरकार को किस तरह के सख्त कदम उठाने चाहिए कमेंट में हमें जरूर बताएं और हमें फॉलो करना ना भूले।

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