Saturday, October 27, 2018

महिला नागा साधु अपने साथ करती है कुछ ऐसा जो आप कभी सोच भी नहीं सकते

वैसे तो भारत कई चीजों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन दुनिया में सबसे ज्यादा भारत की संस्कृति लोकप्रिय है। भारत में सदियों से कई सारी परंपराएं चली आ रही है, परंतु कुछ परंपराएं ऐसी भी है जिन्हें जानकर आप चौक जायेंगे, आज हम आपको महिला साधु से जुड़ी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं।

कुछ लोग यह मानते हैं कि महिला नागा साधु जैसी कोई चीज होती ही नहीं है लेकिन हम आपको बता दें कि यह बात बिल्कुल गलत है। महिला साधु बनना एक विचित्र परंपरा है, जिसके बारे में अधिक लोग नहीं जानते और ना ही अधिक लोग चर्चा करते हैं। आज हम आपको इसके बारे में कुछ दिलचस्प बातें हैं बताने वाले हैं।

वैसे आपको बता दें कि महिला साधु बनना एक कठिन कार्य है, महिला साधु बनने के लिए कठिन परिश्रम करने के साथ-साथ परिवार के मोह को त्यागना पड़ता है जो एक स्त्री के लिए बहुत कठिन कार्य होता है। एक महिला नागा साधू बनने के लिए 5 से 12 साल तक कठिन ब्रम्हचर्य का पालन करना होता है।


एक महिला नागा साधु के लिए अपने गुरु को विश्वास दिलाना जरूरी होता है कि वह कठिन से कठिन ब्रह्मचर्य का पालन कर सकती है। विश्वास दिलाने के बाद ही उसका गुरु उसे महिला नागा साधू की दीक्षा देता है। और हिंदू परंपरा के मुताबिक सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है की महिला नागा साधू को अपना खुद का ही पिंडदान करना पड़ता है। बता दें कि हिन्दू परंपरा में इंसान के मरने के बाद उसका पिंडदान किया जाता है।

पिंड दान की क्रिया को पूरा करने के बाद महिला नागा साधु को सिर का मुंडन करवाना होता है। जिसके बाद नदी में नहाना पड़ता है। जानने वाली बात यह है कि महिला नागा साधु को निर्वस्त्र रहना पड़ता है परंतु महिला नागा साधु को एक पीला वस्त्र भी दिया जाता है जिसको धारण करने के बाद वह साधु बन जाती है। बता दें कि इन सभी क्रियाओं का पालन महिला और पुरुष नागा साधु दोनों को ही करना होता है।

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